1. नारद कुंड
ताप्ती पुराण एवं ताप्ती महात्म को चोरी करके उसे विलुप्त करने लिए देवऋषि नारद को कोढ हो गई थी। इस कुण्ड में देवऋषि ने प्रतिदिन स्नान कर चर्मरोग एवं कुष्ठ रोग से मुक्ति पाई थी। देव ऋषि ने रेल्वे स्टेशन के सामने स्थित नारद टेकडी में बारह वर्षो तक मां सूर्यपुत्री की तपस्या करके उन्हे प्रसन्न किया था। आज भी नारद कुंड एवं नारद टेकडी इस बात का प्रमाण है।
2. पाप कुंड पाप कुण्ड के बारे में कहा जाता है कि यहां पर स्नान करने वाला व्यक्ति पाप दोष से मुक्त हो जाता है। पाप के बारे में कहा गया है कि जाने - अनजाने में किया गया पाप तथा श्राप दोनो से जातक को मुक्ति मिलती है।
3. धर्म कुंड
इस कुण्ड में स्नान करने वाले व्यक्ति को धर्म लाभ मिलता है।
4. सूर्य कुंड
सूर्य की अच्छी एवं बुरी दशा में सूर्य कुण्ड में स्नान करने वाले किसी भी व्यक्ति को उसका लाभ पुण्य मिलता है। सूर्य मंत्र के साथ स्नान करके सूर्य भगवान को इस कुण्ड का जल समर्पित करने से सूर्यदेव प्रसन्न होते है।
5. शनि कुंड
शनि की दशा एवं दिशा से होने वाले कृष्टो से शनि कुण्ड में स्नान करने से लाभ मिलता है। अपनी बहन के घर स्थित इस कुण्ड का जल जब भी शनिदेव को मंत्रोचार के साथ समर्पित किया जाता है तो शनिदेव प्रसन्न हो जाते है। ऐसे जातक को शनि की दिशा एवं दशा से होने वाले दुख दर्द की बाद में भरपाई हो जाती है।
6. ताप्ती कुंड
ताप्ती सरोवर में स्नान का लाभ और कुण्ड में स्नान का लाभ समान है। मंत्रोचार के साथ स्नान करना लाभदायक है।
7. नागा बाबा का मठ कुंड इस कुण्ड में नागा बाबा स्वंय स्नान करते थे तथा यहां पर ताप्ती के पावन जल से वे अपने देवाधिदेव भोलेनाथ को प्रसन्न करते थे। वैसे भी यह क्षेत्र शिव उपासक होने की वजह से ज्यादातर साधनाएं ताप्ती के किनारे ही हुई है। यह तपोभ्ूमि है यहां पर की गया किसी भी प्रकार का तप उस जातक को अन्य तप के मुकाबले जल्द लाभ प्रदान करता है।
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